नई दिल्ली, अप्रैल 20 -- कुमार प्रशांत ,वरिष्ठ पत्रकार व गांधीवादी एक ही रात में हजारों साल पुरानी और समृद्ध ईरानी सभ्यता के अस्तित्व को धरती से मिटा देने की मनोरोगी घोषणा के बाद क्या हुआ? अखबारी दुनिया के लोग कहेंगे कि उसके बाद 15 दिनों का युद्ध-विराम हुआ, इतिहास लिखेगा कि यह युद्ध-विराम कुछ घंटे एक लाश की तरह ढोया गया, क्योंकि यह डोनाल्ड ट्रंप की आस्था से पैदा नहीं हुआ था। यह सब तो हुआ ही, पर वह भी हुआ, जो संभवत: मानवीय सभ्यता के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था। ईरान के जिन आणविक संयंत्रों, पुलों-राजमार्गों, नागरिक सुविधा के दूसरे तंत्रों, पूजा-स्थलों और सांस्कृतिक केंद्रों को बमों से ध्वस्त कर देने की घोषणा राष्ट्रपति ट्रंप ने की थी, हमने देखा कि ईरानी नागरिक अपने-अपने ध्वस्त घरों से निकल-निकलकर इन सभी स्थलों को घेरकर खड़े होते गए। 7 अप...
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