संवाददाता, अप्रैल 7 -- अमेरिका और इसराइल की ईरान से लड़ाई के बीच उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले का एक अनोखा ऐतिहासिक कनेक्शन चर्चा में आ गया है। यह कहानी उस दौर की है, जब ईरान को फारस के नाम से जाना जाता था और वहां के शुरुआती रेल नेटवर्क की नींव खीरी के जंगलों से उखाड़ी गई रेल पटरियों पर रखी गई थी। इतिहास के जानकारों के अनुसार, खीरी के तराई क्षेत्र से भेजी गई यही पटरियां फारस में रेल व्यवस्था शुरू करने का आधार बनीं। प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) से पहले अंग्रेजों ने लखीमपुर खीरी के मैलानी से खुटार तक लगभग 22.52 किलोमीटर लंबी नैरो गेज रेल लाइन बिछाई थी। रेल लाइन का मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक था। अंग्रेज इस मार्ग का उपयोग खीरी के घने जंगलों से कीमती लकड़ी ढोने के लिए करते थे। उस समय यह क्षेत्र वन संपदा से भरपूर था। लकड़ी की आपूर्ति के लिए...
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