कानपुर, मई 20 -- शहर में आवारा कुत्ते लगातार लोगों के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। अब आवारा कुत्ते ज्यादातर गले या इससे ऊपर वार करते हैं। अगर हम वर्ष 25-26 की बात करें तो 47957 हमलों में से 17,875 हमले (औसतन हर तीसरे शख्स के) गले के ऊपर हुए। इसमें जान बचानी मुश्किल हो गई। एंटी रेबीज इंजेक्शन तो लगा ही, जिंदगी और रोशनी तक खतरे में पड़ गई। ऐसे में शहर के डॉक्टर भी पीछे नहीं रहे। कई पेचीदे केस को सुलझाने में पूरा जोर लगा दिया। न सिर्फ लोगों की जान बचाई बल्कि रोशनी भी वापस दिलाई। दिल दहला देने वाली एक घटना डेढ़ वर्ष पहले गोविंद नगर में घटी थी। कुत्तों के झुंड ने छह साल की बच्ची को नोच-नोचकर मार डाला था। तब यह बच्ची कूड़ा बिन रही थी। कुत्तों ने बच्ची के भाई को भी नहीं छोड़ा जो बगल में खेल रहा था। उस पर भी हमला करके गंभीर रूप से घायल कर ...