सुहैल खान, मार्च 9 -- उत्तर प्रदेश के बरेली शहर की दरगाह झंडा शरीफ गौसे आजम में बच्चों से जुड़ी एक अनोखी और सदियों पुरानी परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ निभाई जा रही है। यहां चार साल चार महीने की उम्र पूरी होने पर बच्चों को दरगाह लाकर झंडे और मजार पर खास अंदाज में सलाम पेश कराया जाता है। इस रस्म को देखने के लिए दूर-दराज से जायरीन भी पहुंचते हैं। आस्था और परंपरा से जुड़ी यह अनोखी रस्म बरेली की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। बरेलवी मसलक के दरगाह आला हजरत से जुड़ी दरगाह झंडा शरीफ के सचिव फराज मियां बताते हैं कि परंपरा करीब 400 साल पुरानी है। बताया जाता है कि इराक के बगदाद से सैय्यद मीर वतन झंडा लेकर बरेली आए थे। उसी समय से दरगाह झंडा शरीफ में यह रस्म शुरू हुई, जो समय के साथ एक परंपरा बन गई और आज भी उसी उ...
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