अलीगढ़, अगस्त 25 -- अलीगढ़। एएमयू के सुन्नी थियोलॉजी विभाग द्वारा इस्लामिक फिकह अकादमी के सहयोग से आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें इस्लामी विद्वत्ता में गहन शोध, संदर्भात्मक समझ और आधुनिक उपकरणों के समावेश की आवश्यकता पर बल दिया गया। समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए एएमयू कला संकाय के पूर्व डीन प्रो. कफील अहमद कासमी ने इस्लामी इतिहास और विचारधारा के बारे में फैली भ्रांतियों का मजबूत शोध के माध्यम से प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पद्मश्री प्रो. अख्तरुल वासे ने शोधार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने अध्ययनों में सामाजिक-ऐतिहासिक संदर्भों पर विचार करें।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.