बेंगलुरु, मई 28 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने संभावित इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की 'सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सर्वेक्षण' रिपोर्ट को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है। यह रिपोर्ट जातिगत जनगणना को लेकर है। इसे महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सिद्धारमैया का एक बड़ा राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है, जिससे वे अपना 'अहिंदा' (AHINDA) वोटबैंक और एजेंडा मजबूत कर रहे हैं।क्या है पूरा मामला? कर्नाटक पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष मधुसूदन नायक ने बुधवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सर्वे रिपोर्ट सौंपी। यह वही सर्वे है जिसे आम तौर पर "कर्नाटक जाति जनगणना" कहा जाता है। राज्य में इस समय कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा तेज है और डीके शिवकुमार को अगला मुख्यमंत्री बना...