चेन्नई, जून 3 -- मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अहम और मानवीय फैसला सुनाते हुए एक बांग्लादेशी माँ को अपने बेटे के लिए किडनी दान करने की इजाजत दे दी है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने चेन्नई में उनके नाबालिग बेटे को किडनी दान करने की अनुमति न देने वाले प्राधिकरण के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि तमिलनाडु प्राधिकरण समिति ने इस मामले में "असंवेदनशील और कानूनी रूप से गलत" दृष्टिकोण अपनाया था। दरअसल, किडनी दान करने की इजाजत देने वाली समिति ने उस बांग्लादेशी मां के आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि बच्चे के माता-पिता के बीच वैवाहिक संबंध स्थापित नहीं हुए थे। अपने आदेश में जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने स्पष्ट किया कि इस मामले में एकमात्र प्रासंगिक प्रश्न यह था कि क्या किडनी दाता बच्चे की माँ हैं या नहीं? कोर्ट ने कहा कि समिति का काम सच...