इष्टिकापुरी से इको-टूरिज्म हब तक पहुंचा इटावा
इटावा औरैया, सितम्बर 26 -- इटावा। तमाम विशिष्टताओं की थाती समेटे इटावा की पौराणिक से आधुनिक काल तक अलग पहचान रही है। वैदिक काल में ऋषियों-मुनियों की तपोस्थली के रूप में इसे इष्टिकापुरी कहा गया। अब यह पर्यटन व विकास की अपार संभावनाओं के साथ नई पहचान गढ़ रहा है। यह भी पढ़ें- आस्था-साहित्य और प्रकृति से बदल रही जिले की पर्यटन तस्वीरपर्यटन की संभावनाएँ दिल्ली से कुछ घंटों की दूरी और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के कारण इटावा इको-टूरिज्म, ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है। सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे और धार्मिक स्थलों के सुदृढ़ीकरण से पर्यटन स्थानीय रोजगार का प्रमुख जरिया भी बन रहा है। इटावा की सबसे बड़ी ताकत इसका प्राकृतिक परिवेश है। वन्यजीव प्रेमियों के लिए इटावा सफारी पार्क मुख्य आकर्षण है। यहां प्राकृतिक आवास में शेरों और अन्...
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