कानपुर, अगस्त 22 -- कानपुर, प्रमुख संवाददाता। बीमा कंपनी मनमाने तरीके से शर्तें लगाकर बीमाधारक का हित खत्म नहीं कर सकती है। ऐसे में उसे इलाज खर्च की बकाया धनराशि ब्याज समेत देनी होगी। उक्त टिप्पणी के साथ स्थायी लोक अदालत ने इलाज में खर्च हुए बकाया 57,199 रुपये का भुगतान करने का आदेश बीमा कंपनी को दिया है। इसके साथ ही मानसिक कष्ट के लिए 10 रुपये हर्जाना देने के आदेश भी दिया गया। हूलागंज निवासी दिनेश चंद्र पांडेय ने रक्षा टीपीए प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ के मैनेजर और क्षेत्रीय प्रबंधक द न्यू इंडिया इश्योरेंस कंपनी सिविल लाइन के खिलाफ स्थायी लोक अदालत में परिवाद दाखिल किया था। बतौर आरोप उन्होंने स्वयं, पत्नी सुमन पांडेय और मां उमा देवी के नाम दो मेडीक्लेम पॉलिसियां ली थीं। पॉलिसी 17 अप्रैल 2010 से 16 अप्रैल 2011 तक प्रभावी थी। कोलाइटिस से पीड़ित ...