विधि संवाददाता, मार्च 29 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी या पेंशनर की इलाज के दौरान मृत्यु हो जाती है या वह दावा करने में असमर्थ हो जाता है तो उसके कानूनी वारिस भी मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति का दावा कर सकते हैं। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने यह निर्णय चंद्रचूड़ सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिया कि याची के दावे पर दो माह के भीतर पुनर्विचार कर निर्णय ले और यदि दावा सही पाया जाए तो एक माह के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। याची के पिता सेवानिवृत्त डिप्टी रजिस्ट्रार थे। उनका लखनऊ के निजी अस्पतालों में इलाज हुआ था, जहां उनका निधन हो गया। याची ने इलाज में हुए खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन किया था लेकिन विभाग ने यह कहत...