औरैया, फरवरी 25 -- औरैया, संवाददाता। सरकार आयुर्वेद, होम्योपैथ और यूनानी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के दावे कर रही है, लेकिन जिले के आयुष अस्पतालों की हकीकत इन दावों से मेल नहीं खाती। यहां इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों को अक्सर डॉक्टर के इंतजार, दवाओं की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझना पड़ता है। परिणामस्वरूप, गरीब और ग्रामीण मरीजों को मजबूरन निजी क्लीनिक या एलोपैथिक अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। जिले में कुल 32 आयुष अस्पताल संचालित हैं। जिनमें 21 आयुर्वेद, 9 होम्योपैथिक और 2 यूनानी चिकित्सा केंद्र शामिल हैं। लेकिन अधिकांश केंद्र स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। कई अस्पतालों में डॉक्टर एक दिन छोड़कर बैठते हैं। फार्मासिस्ट की भारी कमी के कारण दवाओं का वितरण भी प्रभावित होता है। यूनानी अस्पतालों में फार्मासिस...
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