दिल्ली, अप्रैल 3 -- इरावती कर्वे भारत की पहली महिला एंथ्रोपॉलजिस्ट के साथ-साथ साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता भी थीं.जर्मनी में पीएचडी करते हुए उन्होंने अपने नाजी प्रोफेसर की नस्लभेदी थिअरी को गलत साबित किया था.इरावती कर्वे को भारत की पहली महिला एंथ्रोपॉलजिस्ट के तौर पर जाना जाता है.हालांकि, बेहद कम लोगों को यह जानकारी है कि इरावती ने जर्मनी आकर अपनी पीएचडी पूरी की थी.1920 के दशक में पीएचडी के दौरान ही उन्होंने अपने नाजी प्रोफेसर यूजीन फिशर की नस्लभेदी थिअरी को गलत साबित किया था.नाजी शासन को चुनौती देने वाली भारतीय राजकुमारी, कैथरीन दलीप सिंहइरावती का जन्म 15 दिसंबर 1905 बर्मा (अब म्यांमार) में हुआ था.उनके पिता गणेश करमरकर ने बर्मा की सबसे प्रमुख नदी "इरावडी" के नाम पर बेटी को इरावती नाम दिया.वह बचपन से ही पढ़ने-लिखने में बेहद होशियार थीं....