रांची, मार्च 9 -- रांची, प्रमुख संवाददाता। रमजान-उल-मुबारक महीने के 18 रोजे मुकम्मल हो चुके हैं। इबादत, संयम और आत्मशुद्धि का प्रतीक यह महीना मुस्लिम समाज के लिए बेहद अहम है। इस दौरान दुनिया भर के मुसलमान रोजा रखते हैं, पांच वक्त की नमाज अदा करते हैं और अल्लाह की रहमत पाने के लिए दुआ मांगते हैं। रमजान में सिर्फ इबादत और रोजे का ही नहीं, बल्कि सदका-ए-फित्र (दान) का भी विशेष महत्व है। ईद की नमाज से पहले यदि परिवार में किसी बच्चे का जन्म होता है, तो उसका भी फितरा देना अनिवार्य है। यह वह राशि है जो समर्थ (साहिब-ए-नसाब) मुसलमान को निकालनी होती है। परिवार का मुखिया यह राशि निकालकर उन मिस्कीनों (जरूरतमंद जो आर्थिक तंगी के बावजूद हाथ नहीं फैलाते) को देता है, ताकि वे भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें।फितरा और जकात पर गरीबों व मोहताजों का हक एदारा...