फतेहपुर, मार्च 14 -- जहानाबाद, संवाददाता। पवित्र माह रमजान का अंतिम अशरा शुरू हो चुका है। यह अंतिम अशरा इस्लामिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। दरअसल इसी अशरे में पवित्र कुरान का अवरतण भी हुआ था। जिसके चलते यह इबादत का माना गया है, वहीं ईद की नमाज से पूर्व गरीबों का हक दिए जाने की भी याद दिलाता है। मौलाना सैय्यद साकिब रजा नकवी ने बताया कि रमजान माह का आखिरी अशरा 21 वें रोजे से शुरू होता है, यह अशरा नौ या दस दिन का भी हो सकता है। इस अशरे का विशेष महत्व है जिसके दौरान रोजदारों द्वारा दुनियावी कामों को छोड़ कर रात दिन मस्जिदों या एकांत में रहकर अल्लाह की इबादत की जाती है, जिसे एतेकाफ कहा जाता है। इस माह के अन्तिम दिन पापों से मुक्ति पाने के होते हैं। इसके विशेष महत्व का एक कारण यह भी है कि इस अशरे में इस्लाम के लिखित संविधान अर्थात पवि...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.