सहारनपुर, फरवरी 25 -- माह-ए-रमजान में अल्लाह रब्बुल इज्जत अपने रोजेदार बंदे के सबसे नजदीक होते हैं। इसलिए इफ्तार के वक्त मांगी गई दुआएं कबूल होती हैं। इसलिए हमे मेहनत और हलाल की कमाई के साथ इफ्तार करना चाहिए। दारुल उलूम वक्फ के शेखूल हदीस मौलाना अहमद शाह खिजर मसूदी ने माह-ए-रमजान के रोजे रुह (आत्मा) और जिस्म की शुद्धि के लिए रखे जाते हैं। क्योंकि रमजान का रोजा हमारी रुह को अल्लाह रब्बुल इज्जत से मिलाता है। कहा कि 11 माह इबादत के साथ दुनियां के लिए और माह-ए-रमजान का महिना अल्लाह की पूर्ण इबादत में गुजारना चाहिए। मौलाना अहमद खिजर मसूदी ने कहा कि अगर हमे अपनी दुआएं कबूल होती देखनी हैं तो सिर्फ रमजान में ही नहीं बल्कि अपनी जिंदगी में सिर्फ हलाल रोजी से ही खान-पान करना चाहिए। बताया कि माह-ए-रमजान में अल्लाह रब्बुल इज्जत सबसे निचले आसमान पर होत...
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