नई दिल्ली, मार्च 28 -- कायदे से उस तस्वीर को दुनिया के हर अखबार और टीवी चैनल की सुर्खियों में होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। युद्धोन्माद पैदा कर रहे मीडिया के साथियों ने उसे आसानी से बिसरा दिया। क्या हमने अपने चारों ओर एक अंधा और असंवेदनशील समाज रच लिया है? इस सवाल का जवाब देने से पहले मैं उस तस्वीर के बारे में बताना चाहूंगा। गई 24 मार्च को रोम की सड़कों पर दर्जनों महिलाएं हाथ में हाथ डालकर नंगे पैर निकल पड़ीं। वे इजरायल और गाजा से आई माताएं थीं। उनके बच्चों अथवा नजदीकी रिश्तेदारों को हमास के हमलों या उससे उपजे इजरायली इंतकाम का शिकार होना पड़ा था। उनका संदेश साफ था। इजरायल और गाजा में भले ही शेर और बिल्ली जैसा बैर हो, लेकिन वहां के पीड़ित आदम और हव्वा की संतानें हैं, उन्हें अमन चाहिए। जो लोग सोचते हैं कि इजरायल में जन्मा हर इंसान गाजा मे...
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