लखनऊ, मई 2 -- अस्थमा में मरीजों की सांस फूलती है। रोजमर्रा के काम तक प्रभावित होते हैं। समय पर बीमारी की पहचान और सटीक इलाज से बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। मरीज सामान्य व्यक्तियों की तरह जीवन जी सकता है। इनहेलर व दूसरी नई दवाएं बीमारी से मुकाबला करने में अधिक कारगर हैं। यह जानकारी लोहिया संस्थान में रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अजय वर्मा ने दी। वह शनिवार को लोहिया संस्थान प्रेक्षागृह में अस्थमा पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। डॉ. अजय वर्मा ने कहा कि अस्थमा एक ऐसी सांस संबंधी बीमारी है। जिसमें मरीज को सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न और बार-बार खांसी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने कहा कि अस्थमा के इलाज में इनहेलर सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है, क्योंकि यह सीधे फेफड़ों...