नई दिल्ली, मई 21 -- नीरजा चौधरी, वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक कई लोगों को 21 मई, 1991 की वह उदास रात आज भी याद होगी, जब तकरीबन 10 बजे यह खबर आई कि तमिलनाडु के श्रीपेरुंबुदूर में राजीव गांधी आत्मघाती हमले का शिकार हो गए। वह एक चुनावी सभा को संबोधित करने गए थे। उनके शव इतने क्षत-विक्षत हो गए थे कि उन्हें उनके जूतों से पहचाना जा सका। महज 40 साल की उम्र में देश की बागडोर संभालने वाले राजीव गांधी सबसे युवा प्रधानमंत्री थे। वह भी अपनी मां इंदिरा गांधी की तरह, जिनकी 1984 में हत्या कर दी गई थी, आतंकवाद के शिकार हुए। बेशक, आज उनके 'बलिदान' को याद करते हुए कांग्रेस रील जारी करती है, पर यह सवाल कौंधता है कि यदि उनकी हत्या न हुई होती, तो आज भारत कैसा होता? राजीव सही मायने में 'एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर' थे। 31 अक्तूबर, 1984 को सुबह 9.30 बजे वह पश्चिम बं...