देहरा (कांगड़ा), मार्च 20 -- भारत का मूल स्वभाव संघर्ष का नहीं है, किंतु जब जरूरी हो तो वह करना होगा। भारत विभाजन के कारण जम्मू-कश्मीर के छिने हुए हिस्सों को वापस पाने को लेकर ये बातें जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र के निदेशक आशुतोष भटनागर ने कहीं। दिल्ली से आए वक्ता ने केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के कश्मीर अध्ययन केंद्र की ओर से आयोजित संगोष्ठी में जम्मू-कश्मीर और विभाजन से जुड़े कई विषयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब हम भूगोल की बात करते हैं तो उससे रिश्ता भी याद रखना होगा। क्या हम जानते हैं कि हिंदुकुश पर्वत या फिर शिवालिक से हमारा क्या रिश्ता है। यदि हम कब्जा हुए क्षेत्रों को वापस पाना चाहते हैं तो वहां के लोग भी हमारे हैं। उन्होंने कहा कि यदि भारत विभाजन नहीं होता तो क्या ये लोग हमारे साथ नहीं होते। आशुतोष भटनागर ने कहा कि...