इटावा औरैया, फरवरी 17 -- हैवरा कोठी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सती, ध्रुव, पृथु-अर्ची और जड़भरत की कथा सुनायीं गयी। प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया गया कि जीवन की विपरीत परिस्थितियां मनुष्य को तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि उसे तपाकर मजबूत बनाने के लिए आती हैं। अपमान को प्रेरणा, मोह को वैराग्य और कठिनाई को संकल्प में बदलने वाला ही आध्यात्मिक ऊंचाई प्राप्त करता है। कथा व्यास स्वामी प्रणवपुरी महाराज ने कहा कि भागवत कथा आत्मजागरण का माध्यम है। सती चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि धर्म और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए त्याग की भावना आवश्यक है। जब व्यक्ति अपने सिद्धांतों पर अडिग रहता है, तभी उसका जीवन सार्थक बनता है। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्ति में लीन नजर आए। कई बार पंडाल जयकारों से गू...