इटावा औरैया, जनवरी 9 -- कुदरैल स्थित प्राचीन भुम्मसेन मंदिर में आयोजित श्रीराम कथा के अंतिम दिन श्रद्धा और भक्ति का वातावरण चरम पर रहा कथा व्यास पं. रमेशचंद्र तिवारी ने भगवान श्रीराम द्वारा रावण वध की कथा का विस्तार से वर्णन किया। कथा के दौरान जैसे ही रावण वध का प्रसंग आया, पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। कथा व्यास ने बताया कि रावण केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि अहंकार, अधर्म और अन्याय का प्रतीक था। श्रीराम ने उसका वध कर यह संदेश दिया कि अधर्म चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन आदर्शों से भरा है और प्रत्येक मनुष्य को उनके चरित्र से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सत्य, संयम और मर्यादा का पालन करना चाहिए। कथा के दौरान राम-रावण युद्ध, लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध और विभीष...
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