इटावा औरैया, फरवरी 10 -- श्री राम कथा महोत्सव में व्यासपीठ श्यामजी ने चौथे दिन की कथा में राम-सीता विवाह का प्रसंग सुनाया गया। कथावाचक ने बताया कि कैसे अयोध्या से बारात मिथिला आई और भरत का मांडवी से, लक्ष्मण का उर्मिला से, और शत्रुघ्न का श्रुति कीर्ति से विवाह सम्पन्न हुआ। जानकी की विदाई पर मिथिलावासी और पशु-पक्षी भी रो पड़े, इस दौरान उपस्थित श्रोता भाव विभोर हो गए। तत्पश्चात भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। सभी भक्त राम के भजनों पर झूमते-गाते नजर आए और उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। कथा के दौरान उन्होंने भक्तों को क्रोध पर नियंत्रण रखने की सीख दी और लक्ष्मण-परशुराम संवाद का उदाहरण देते हुए वाणी की मधुरता का महत्व समझाया। कई बार श्रद्धालु नाच गान के साथ विभोर हो गे।
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