इटावा औरैया, दिसम्बर 13 -- महोत्सव पंडाल में स्थानीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवियों ने ओज, श्रृंगार, करुण, हास्य व्यंग्य आदि रसों से ओतप्रोत कविताओं से खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व राज्यमंत्री अशोक यादव ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया। कवि सम्मेलन की शुरुआत वरिष्ठ कवि दीपचंद्र त्रिपाठी निर्बल ने सरस्वती वंदना मात वीणापणि करुणा कीजिए, दास निर्बल की विनय सुन लीजिए के साथ की। अवधेश भ्रमर ने कहा वचन मीठे किंतु गंदे आचरण हैं, और चेहरे पर बहुत से आवरण हैं। मर्म से कुछ कर्म से कुछ नाम से कुछ, आज वे ही जिंदगी के व्याकरण हैं। अरविंद योगी ने जब जब बाट किसी ने हेरी तब तब हमने गीत लिखे, मूर्तिकार ने मूर्ति उकेरी तब तब हमने गीत लिखे। गोविंद माधव शुक्ला ने घाव कैसा भी हो एक रोज तो भर ही जाता...
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