नई दिल्ली, जुलाई 27 -- नोट: कृप्या एचटी का लोगो लगाएं, ग्राफ के लिए एचटी देखें युवा आबादी पहले ही पीक पर पहुंच चुकी, पर उम्मीदें ज्यादा अभिषेक झा,रौशन किशोर नई दिल्ली। भारतीय राजनीति हमेशा से छात्र आंदोलनों को लेकर बेहद संवेदनशील रही है, और इसके पीछे ठोस ऐतिहासिक वजहें हैं। देश का मौजूदा शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व 1970 के दशक के ऐतिहासिक 'आपातकाल-विरोधी आंदोलन' से उपजी है। 1977 में जब पहली बार गैर-कांग्रेसी ताकतों ने एक जुट होकर सत्ता परिवर्तन किया, तब भी सड़कों पर उतरे छात्रों ने उस बदलाव में अहम भूमिका निभाई थी। उस दौर के कई युवा प्रदर्शनकारी आगे चलकर देश के बड़े सियासतदां बने।

नीट पेपर लीक के विरोध-प्रदर्शनों हाल ही में थमे नीट पेपर लीक के विरोध-प्रदर्शनों के बाद यह बहस एक बार फिर नए सिरे से छिड़ गई है।

वोटरों के तौर पर 18-29 साल ग्रुप क...