नई दिल्ली, मार्च 28 -- नोट::कृप्या एचटी का लोगो लगाएं, ग्राफ के लिए एचटी का पेज 2 देखें पहले से अधिक आर्थिक नुकसान की वजह बन रहारोशन किशोरनई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल की सीमा को पार करना दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए उड़ान के बीच झटकों की तरह है। अगर यह दौर लंबा खिंच जाए, तो इससे गंभीर नुकसान हो सकता है। भारत के लिए भी आज की स्थिति उस दौर से बिल्कुल अलग है, जब पहली बार तेल की कीमतें इस स्तर पर पहुंची थीं।हालांकि, भारत के लिए कच्चे तेल की कीमत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार के डॉलर भाव पर निर्भर नहीं करती, बल्कि डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति पर भी निर्भर करती है। इसका मतलब है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए, रुपए के हिसाब से वास्तविक कीमतें बहुत ज्यादा अलग हो सकती हैं। पूरी दुनिया में कच्चा तेल खरीदने के लिए डॉलर का इस्...
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