नई दिल्ली, सितम्बर 24 -- इस रेस में अमेरिका और चीन सबसे आगे अभिषेक झा नई दिल्ली। जब एआई अपनी पूर्ण क्षमता पर पहुंचेगा तो यह इंसानों की जगह ले सकता है। लेकिन इसे विकसित करने की दौड़ मुख्य रूप से अमेरिका और चीन के शोधकर्ताओं के बीच है। अमेरिका दुनियाभर के टैलेंट को अपने यहां काम पर रख रहा है, वहीं चीन स्वदेशी टैलेंट पर निर्भर है। इस दौड़ में भारत केवल शुरुआती एआई प्रतिभाएं तैयार करने वाला केंद्र बनकर रह गया है।

अमेरिका और चीन सबसे आगे ये बातें कार्नेगी चाइना के डेमियन मा और बिनी यांग के अध्ययन में कही गई हैं। यह अध्ययन मशीन-लर्निंग के सबसे प्रतिष्ठित कॉन्फ्रेंस न्यूरल इंफॉर्मेशन प्रोसेसिंग सिस्टम्स में स्वीकृत शोधपत्रों के विश्लेषण पर आधारित है। 2022 से 2026 के बीच बेहतरीन एआई शोधकर्ताओं की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है। शोधकर्ताओं की संख...