इंद्रियों पर संयम से आत्मशुद्धि की ओर बढ़ना ही उत्तम ब्रह्मचर्य
रामपुर, सितम्बर 25 -- फोटो रामपुर। दशलक्षण पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन शुक्रवार को जैन समाज ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की। श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र देव की पूजा-अर्चना कर मन, वचन और कर्म में संयम अपनाने का संकल्प लिया।84 कोस मथुरा से रामपुर आए शास्त्री नमन जैन ने कहा कि उत्तम ब्रह्मचर्य केवल शारीरिक संयम तक सीमित नहीं है। इंद्रियों को विषय-विकारों से दूर रखते हुए विचारों की पवित्रता, वाणी की मर्यादा और आचरण की शुद्धता बनाए रखना ही इसका वास्तविक स्वरूप है। मनुष्य जब अपनी इच्छाओं और इंद्रियों पर नियंत्रण करता है, तभी आत्मिक शांति की ओर बढ़ता है।शास्त्री आर्जव जैन ने कहा कि मनुष्य का सबसे बड़ा संघर्ष बाहरी दुनिया से नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं और चंचल मन से होता है। यह भी पढ़ें- Dehradun News: अनंत चतुर्दशी पर निकली भव्य शोभायात्रा, उ...
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