इंद्रियों के वश में होना भी पराधीनता
वाराणसी, सितम्बर 19 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। पराधीन होने का अर्थ किसी मनुष्य का किसी मनुष्य के अधीन होना नहीं है। अपनी इंद्रियों और वृत्तियों के वश में हो जाना भी पराधीनता है। ये बातें औघड़ बाबा गुरुपद संभव राम ने कहीं। शुक्रवार को अघोरेश्वर महाप्रभु की 90वीं जयंती पर पड़ाव स्थित अघोर पीठ, श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम के मुख्य सभागार में हुई गोष्ठी में उन्होंने कहा कि इंद्रियों के वश में होने के बाद मनुष्य के जीवन में लोभ, क्रोध, अहंकार आदि विकृतियां दुख और अशांति पैदा करती हैं। महापुरुषों की शिक्षाएं सुनना ही पर्याप्त नहीं है। उनका अध्ययन, चिंतन करते हुए अपने आचरण में उतारना भी आवश्यक है। यह भी पढ़ें- Chandauli News: इंद्रियों की पराधीनता छोड़कर विवेक के मार्ग पर चलें: संभव राम उन्होंने कहा कि समाज में कटुता, विभाजन, स्वार्थ...
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