इंदिरा गाथा:रोशनी और परछाइयां
नई दिल्ली, अक्टूबर 24 -- वह सितंबर, 1982 की एक खुशनुमा सुबह थी। मैं कहीं से इलाहाबाद स्थित घर लौट रहा था कि बगल के मोहल्ले जॉर्ज टाउन में पीएसी और स्थानीय पुलिस के कुछ जवान खड़े दिखाई पड़े। वर्दीधारियों के उस समूह का नेतृत्व कर रहे अधिकारी से मेरी जान-पहचान थी। उनकी वहां तैनाती का कारण पूछने पर प्रति-प्रश्न मिला- आप नहीं जानते, प्रधानमंत्री आ रही हैं? प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, अचानक? क्यों? इन सवालों पर विचार करता हुआ मैं वहीं खड़ा हो गया। सामने श्रीमती एस एस नेहरू का बंगला था। वह ब्रिटेन में भारत के पहले उच्चायुक्त स्वर्गीय एस एस नेहरू की पत्नी थीं। एस एस नेहरू और जवाहरलाल नेहरू करीबी रिश्तेदार हुआ करते थे और उनके यहां प्रधानमंत्री का आना कोई अनोखा नहीं था, लेकिन दो-तीन दिनों बाद ही उन्हें तत्कालीन सोवियत संघ के महत्वपूर्ण दौरे पर जाना था...
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