गुड़गांव, अप्रैल 6 -- गुरुग्राम। देश की सेवा करने वाले जवान सिर्फ सरहद पर ही नहीं लड़ते, कई बार उन्हें अपने हक के लिए सिस्टम से भी लड़ना पड़ता है। शहर के सीआरपीएफ सहायक कमांडेंट जिले सिंह, जिन्हें 2019 में बहादुरी के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था, आज 7 साल बाद भी अपनी पूरी सम्मान राशि का इंतजार कर रहे हैं। वर्ष 2017 में आतंकियों से मुकाबला कर साथियों की जान बचाने वाले इस वीर अधिकारी को जहां देश ने सम्मान दिया, वहीं उनका हक अब तक अधूरा है। 31 लाख रुपये की घोषित राशि में से केवल 7 लाख रुपये ही मिल पाए हैं, जबकि बाकी के लिए वे लगातार प्रयास कर रहे हैं। अब उन्होंने भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और गृह मंत्रालय तक अपनी बात पहुंचाई है। इस लड़ाई में रिटायर्ड सूबेदार राजपाल सैनी भी उनके साथ खड़े हो गए हैं और लगातार प्रयास कर रहे हैं क...