बिहारशरीफ, अप्रैल 19 -- बारिश01 - 20 मार्च की रात आयी आंधी-बारिश के कारण अस्थावां के खेत में गिरी गेहूं की तैयार फसल। प्राकृतिक आपदा के कारण किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। (फाइल फोटो) संवाद में किसानों ने कहा कि आज के दौर में खेती सिर्फ मेहनत का नहीं, बल्कि किस्मत का खेल बन गई है। कभी बेमौसम की मूसलाधार बारिश पककर तैयार फसल को खेत में बिछा देती है तो कभी भीषण सूखा और तपती पछुआ हवाएं उम्मीदों को झुलसा देती हैं। प्रकृति की इस दोहरी मार ने खेती के साथ ही किसान भी मजधार में फंसे रहते हैं। मौसम के साथ-साथ महंगाई का कोड़ा भी किसान की पीठ पर ही बरस रहा है। यह भी पढ़ें- चिंता: बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, सुखाड़ और बाढ़ से खेती पर संकट हर साल खाद, उन्नत बीज, कीटनाशक, कृषि यंत्रों के किराये और मजदूरी की लागत आसमान छू रही है। छह महीने तक हाड़तोड़ म...
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