प्रयागराज, मार्च 24 -- प्रयागराज, वरिष्ठ संवाददाता। शीतगृहों और प्लांटों में लगातार गैस रिसाव के कारण हादसे होते रहे, लेकिन इन हादसों को लेकर उद्यान विभाग हमेशा से उदासीन ही रहा है। शायद यही कारण है कि शीतगृहों को लाइसेंस जारी करने के लिए विभाग केवल निजी इंजीनियर की रिपोर्ट पर ही निर्भर रहता है।चंदापुर के आदर्श शीतगृह में सोमवार को हादसा होने के बाद प्रशासनिक लापरवाही की परतें भी खुलने लगी हैं। शीतगृह को लाइसेंस जारी करने के पहले कोई विभागीय निरीक्षण नहीं किया जाता है। बस इंजीनियर की रिपोर्ट को आधार मान लिया जाता है और जिला उद्यान विभाग लाइसेंस जारी कर देता है। नियमानुसार जिला उद्यान अधिकारी को लाइसेंस जारी करने से पहले एक बार खुद भी भौतिक सत्यापन करना चाहिए लेकिन इसकी जहमत अफसर नहीं उठाते हैं।चंदापुर में हुए शीतगृह हादसे के अगले दिन मंगल...