बिजनौर, जनवरी 26 -- सत्पुरुष बाबा फुलसंदे वालों ने कहा कि आस्था और व्यवहार यह धर्म की दो मुख्य धाराएं हैं। उस परमेश्वर का सौंदर्य पाने के लिए हमें अपनी आत्मा, शरीर को पूरी तरह से परमेश्वर के रंग में सुनहरा करना होगा। रविवार को फुलसंदा आश्रम में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रखंड वाले बाबा ने कहा प्रभु की आराधना हृदय में प्रकाश बनाकर सदा निवास करें। आराधना रूपी अमृत सतगुरु प्रदान करते है। जो सतगुरु के धर्म युक्त वचनों में भुनरक्त है। उन्होंने कहा कि जो धर्म का भावपूर्ण आचरण करते हैं, निर्मल और संताप से रहित होकर जन्म मृत्यु रुपी संसार से तर जाते हैं। उन्होंने कहा कि हे देवपुत्रों आस्था की स्थापना आध्यात्मिक आधार पर और व्यवहार की का पथ धर्माचरण होता है। यह दोनों ही मुख्य धाराएं होती है। परमेश्वर का मंत्र जो सतगुरु ने दिया है...
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