आस्था और अनुशासन का अद्भुत संगम है कांवड़ यात्रा
डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी, अगस्त 4 -- डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी, वेद विभागाध्यक्ष, श्री गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोरखनाथ मंदिर, गोरखपुर सावन के इस महीने में उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत में कांवड़ियों के झुंड कंधों पर गंगाजल लिए शिवत्व को आत्मसात करते अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं तो यह सनातन परंपरा की उस अनंत धारा का साक्षात प्रकटीकरण है, जो प्राचीन काल से भारतीय चेतना में प्रवाहित है। यह महीना शिव-आराधना का सबसे पवित्र काल है। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र-मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने इसी समय कंठ में धारण किया था और सृष्टि को विनाश से बचाया था। कांवड़िए गंगाजल लेकर शिवलिंग पर अभिषेक करते हैं तो यह उनके प्रति कृतज्ञता का ज्ञापन है, जिन्होंने संसार के कल्याण के लिए विष पिया। यह त्याग और भक्ति क...
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