नई दिल्ली, मई 4 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अनचाही गर्भधारण की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि गर्भपात का आदेश देना आसान नहीं होता। यह बहुत ही मुश्किल स्थिति है, एक लड़की गर्भवती हो जाती है, जिसकी अभी शादी नहीं हुई है, यह उसके लिए गहरा सदमा होता है। शीर्ष अदालत ने नाबालिग लड़की की 30 सप्ताह का गर्भ खत्म करने से जुड़े मामले में केंद्र और एम्स के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही बंद करते हुए यह टिप्पणी की। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने यह टिप्पणी तब की, जब अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि शीर्ष अदालत के 24 अप्रैल के आदेश का पालन कर लिया गया है। इसके बाद पीठ ने कहा कि ऐसे में प्रतिवादियों केंद्र और एम्स के खिलाफ अवमानना कार्यवाही खत्म की जाती है। जस्टिस नागरत्ना ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसा निर्द...
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