आसमान से बरसा अमृत, नालों में बह गया पानी
अलीगढ़, अगस्त 27 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। बारिश कभी अलीगढ़ की धरती के लिए जीवन का सबसे बड़ा सहारा मानी जाती थी। सावन-भादो के महीनों में रुक-रुककर होने वाली वर्षा खेतों को सींचती थी, तालाबों को भरती थी और धरती की प्यास बुझाकर भूजल को नया जीवन देती थी। लेकिन अब मानसून का मिजाज बदल चुका है। बारिश के दिन लगातार कम हो रहे हैं। कुछ घंटों या दो-तीन दिनों की तेज वर्षा पूरे महीने का हिसाब पूरा कर देती है। परिणामस्वरूप शहर जलभराव से जूझता है, जबकि भूजल लगातार नीचे जा रहा है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आसमान से बरसने वाला करोड़ों लीटर मीठा पानी हमारी आंखों के सामने नालों के रास्ते बहकर बर्बाद हो रहा है। बदलते जलवायु चक्र और तेजी से बढ़ते शहरीकरण ने बारिश का पूरा स्वरूप बदल दिया है। पिछले 10 वर्षों के वर्षा आंकड़े बताते हैं कि जिले में औसत वर्षा ...
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