आषाढ़ पूर्णिमा पर अनुयायियों ने ओड़ाझार में किया मंगल पाठ
श्रावस्ती, जुलाई 30 -- श्रावस्ती,संवाददाता। अनाथ पिंडक चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आषाढ़ पूर्णिमा पर ओड़ाझार स्तूप में मंगल पाठ का आयोजन किया गया। इस दौरान भिक्षु संघ और भिक्षु देवेंद्र महाथेरो की अध्यक्षता में सभी जीवों के दुख मुक्ति के लिए पूजा-अर्चना की गई। बौद्ध भिक्षु देवेंद्र महाथेरो ने कहा कि आषाढ़ पूर्णिमा को भगवान बुद्ध का गर्भ मंगल, गृह त्याग और धर्म चक्र परिवर्तन हुआ था। इसे त्रिविध पावनी आषाढ़ पूर्णिमा भी कहा जाता है। इसी दिन से वर्षावास का प्रारंभ होता है जो क्वार पूर्णिमा तक चलता है। वर्षा ऋतु में रास्ते बंद हो जाते थे। इसलिए भगवान बुद्ध ने भिक्षुओं के लिए वर्षावास का नियम किया था। इस दौरान भिक्षु एक स्थान पर रहकर धर्म और विनय का अनुशीलन करते हैं तथा ध्यान में लीन रहते हैं। यह उपासकों को धर्म सुनने, संघ की सेवा करने और कुशल कर्...
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