मधुबनी, जनवरी 3 -- झंझारपुर। झंझारपुर में भीषण ठंड और शीतलहर के बीच नगर परिषद की नींद आखिर टूट ही गई। 'हिन्दुस्तान' अखबार के 3 जनवरी के अंक में "कागजों में 'हाईटेक' आश्रय स्थल, हकीकत में खाली टेंट, बेड भी नहीं" शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। खबर का असर कुछ ऐसा हुआ कि प्रकाशित होने के चंद घंटों के भीतर ही वेंडर साजो-सामान के साथ मौके पर पहुंच गया और आनन-फानन में आश्रय स्थल को सुविधाओं से लैस करने का काम शुरू कर दिया गया। नगर परिषद की योजना के अनुसार, झंझारपुर स्टेशन परिसर में यात्रियों और बेसहारा लोगों को ठंड से बचाने के लिए 31 दिसंबर तक ही इस 'आधुनिक' वॉटरप्रूफ अस्थाई आश्रय स्थल को शुरू कर दिया जाना था। लेकिन हकीकत में यह तीन दिनों तक केवल एक खाली पंडाल बना रहा। 24 घंटे के भीतर 20 बेड की क्षमता वाले र...