एटा, अप्रैल 13 -- एटा। भारतीय संगीत की स्वर साधिका आशा भोसले के निधन पर राष्ट्रीय तूलिका मंच की शांतिनगर में शोकसभा हुई। जिसमें काव्य जगत से जुड़े लोगों ने उनको विचारों के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की। संस्थापक डा.राकेश सक्सेना ने कहा कि 8 सितम्बर 1933 को महाराष्ट्र सांगली में जन्मी दीनानाथ मंगेशकर की पुत्रियों में लता के बाद आशा भोसले का देहावसान भारतीय संगीत के दूसरे अध्याय का समापन है। पांचवें-छठे दशक में अपनी विशिष्ट शैली से श्रोताओं को आकर्षित किया। डा.अरुण उपाध्याय ने बताया कि आशा भोसले की गायिकी बहुआयामी थी। अर्पित उपाध्याय ने बताया कि संगीतकार आरडी वर्मन के साथ मिलकर आशा भोसले ने संगीत को नये स्वर प्रदान किए। संस्था अध्यक्ष डा. रामनिवास यादव ने कहा कि आशा भोसले उन गायिकाओं में से हैं जिन्होंने समय के साथ अपनी गायिकी में परिवर्त...
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