आशा दीदी के तीन कर्णप्रिय गीतों ने 'तीसरी कसम' को बना दिया अमर
अररिया, अप्रैल 12 -- अररिया से फुलेन्द्र कुमार मल्लिक की रिपोर्ट सैकड़ों फिल्मों के गीतों की स्वरों को सजाने वाली और शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में खास मुकाम हासिल करने वाली 92 साल की गायिका आशा दीदी इस दुनिया में नहीं रही। रविवार को जैसे ही उनकी मौत की खबर आई, रेणु जनपद के चहेते भी खामोश हो गये। आशा भोंसले का निधन संगीत जगत के साथ-साथ रेणु जनपद के लोगों के लिए एक बड़ा झटका था। हो भी क्यों नहीं अमरकथा शिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी 'मारे गए गुलफाम' पर बनी फिल्म 'तीसरी कसम' को अमर बनाने में जहां हीरो राजकपूर व हिरोइन वहीदा रहमान का शानदार अभिनय था तो वहीं आशा भोंसले के कर्णप्रिय गीतों का योगदान भी कम नहीं रहा। आज भी रेणु जनपद के लोग उनके गीत गुनगुनाते हैं। इनके कर्णप्रिय गानों पर थिरकते हैं। लटके-झटके वाली शास्त्रीय नौटंकी अंदाज में गाये ग...
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