जमशेदपुर, दिसम्बर 6 -- झारखंड राज्य विश्वविद्यालय संविदा शिक्षक संघ ने आवश्यकता आधारित शिक्षकों समायोजन की जगह वरीयता अंक देने पर जताया असंतोष जताया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार पाण्डेय ने एक बयान जारी कर झारखंड सरकार के उस निर्णय को अनुचित बताया है जिसमें सरकार ने कहा है कि राज्य के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में वर्षों से पढ़ा रहे आवश्यकता आधारित शिक्षकों को समायोजित नहीं किया जायेगा। साथ ही प्रतिवर्ष एक और अधिकतम 5 वरीयता अंक प्रदान करने के निर्णय को भी पाण्डेय ने हास्यास्पद बताया है। डॉ. पाण्डेय ने कहा कि देश के कई राज्यों ने ऐसे शिक्षकों की सेवा नियमित की है तो झारखंड सरकार क्यों नहीं कर सकती। बगल का राज्य बिहार में जब वरीयता के 5 अंक प्रत्येक वर्ष और अधिकतम 25 अंक दिया जा रहा तो झारखंड सरकार आखिर मात्र अधिकतम 5 व...
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