नई दिल्ली, जून 30 -- कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि अदालतें तभी अंतरिम या अंतिम गुजारा-भत्ते का आदेश दें, जब यह साबित हो जाए कि पत्नी के पास अपना खर्च चलाने के लिए आर्थिक साधन नहीं हैं। जस्टिस डॉ. चिल्लाकुर सुमालथा ने मैसूर की अदालत के 19 दिसंबर, 2025 के आदेश को चुनौती देने वाली पति की याचिका मंज़ूर करते हुए कहा कि निचली अदालत पत्नी की आय पर विचार करने में विफल रही। अदालत ने कहा कि पत्नी ने हलफनामे में खुद बताया था कि उसे हर महीने 1,00,000 रुपये वेतन मिलता है। हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत को पत्नी की कमाई पर भी चर्चा करनी चाहिए थी और उसके बाद अंतरिम गुजारा-भत्ता पाने के अधिकार के बारे में किसी नतीजे पर पहुंचना चाहिए था। अदालत ने कहा कि जब पत्नी आर्थिक रूप से मज़बूत हो, या पत्नी की आय पति से ज्यादा हो और पत्नी पर बच्चों की देखभाल जैसी कोई अन...