जमशेदपुर, फरवरी 25 -- सीतारामडेरा के चहल-पहल वाले इलाके में सोमवार शाम एक अजीब सी खामोशी ने अकेलेपन के आगोश में हमेशा के लिए खत्म होने चुकी दो जिंदगियों की कहानी बयां की। यह कहानी एक ऐसी शिक्षिका की है, जिसने ताउम्र दूसरों के भविष्य को उजाला से भर दिया, लेकिन खुद का जीवन अभावों के घने अंधेरे में गुम हो गया। जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज की सेवानिवृत्त असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सरस्वती सरकार और उनके भाई का एक साथ मौत को गले लगा लेना एक साधारण आत्महत्या नहीं, बल्कि यह आर्थिक तंगी और एकाकीपन की उस गहरी खाई का दस्तावेज है, जिसमें आज का मध्यमवर्ग चुपचाप झेल रहा है। 67 वर्ष की डॉ. सरस्वती सरकार ने जीवन के वसंत कॉलेज की संविदा नौकरी को दे दिए। विडंबना देखिए, जिस उम्र में इंसान को सुकून की छांव मिलनी चाहिए थी, वहां उनके पास इलाज के लिए बुनियादी पूंजी तक...
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