नई दिल्ली, दिसम्बर 14 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि पत्नी द्वारा अपनी आय छिपाने के कारण उसे आर्थिक भरण-पोषण का अधिकार नहीं दिया जाता, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसे पति के घर में रहने का अधिकार नहीं मिलेगा। न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की पीठ पत्नी दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। इस याचिका में फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत पति द्वारा दी जाने वाली अंतरिम भरण-पोषण राशि को पत्नी के लिए निरस्त कर दिया गया था। मामले के अनुसार, पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें दहेज प्रताड़ना, मौखिक और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे। मजिस्ट्रेट अदालत ने प्रारंभ में पति को पत्नी और बेटे के लिए 30 हजार रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। पति ने इस आदेश...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.