नई दिल्ली, अक्टूबर 1 -- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (1 अक्तूबर) को एक पूर्व जज को झटका देते हुए दो टूक लहजे में कहा है कि उसके सामने सभी नागरिक बराबर हैं। चाहे वो चपरासी हों या चीफ सेक्रेटरी या पूर्व जज ही क्यों न हों? शीर्ष अदालत की ये कठोर टिप्पणी एक पूर्व जिला जज का उस याचिका को खारिज करते हुए आई, जिसमें पूर्व जज ने प्राथमिकता के आधार पर तुरंत सुनवाई का अनुरोध किया था। पूर्व जज ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा अपनी कथित गैर-कानूनी बर्खास्तगी को चुनौती देने वाले मामले की सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश देने की मांग की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि भारत के संविधान के तहत गारंटीकृत समानता का अधिकार ऐसे 'आउट-ऑफ-टर्न' (सामान्य क्रम से हटकर) हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देता है, सिर्फ़ इसल...