किशनगंज, जून 26 -- ठाकुरगंज। निज संवाददाता आपातकाल की याद आते ही 80 वर्षीय जेपी सेनानी नागराज नखत की आंखें नम हो जाती हैं। लोकतंत्र की रक्षा के लिए चले संघर्ष में उन्होंने जेल की सलाखों के पीछे कई महीने बिताए, लेकिन सबसे बड़ी टीस उन्हें इस बात की है कि वे अपनी बेटी के जन्म के समय उसके पास नहीं थे। बेटी की पहली किलकारी सुनने और उसे गोद में लेने का सुख उनसे छिन गया था। यह भी पढ़ें- लोकतंत्र की हत्या का काला अध्याय है आपातकालअपातकाल के दौरान संघर्ष नागराज नखत बताते हैं कि आपातकाल लागू होने के बाद वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय थे। प्रशासन की नजर उन पर थी और गिरफ्तारी से बचने के लिए वे कई महीनों तक भूमिगत रहकर संगठनात्मक गतिविधियों में जुटे रहे। आखिरकार 6 जनवरी 1976 को पौवाखाली के एलआरपी चौक से उन्हें गिरफ्तार कर लि...