आपातकाल की काली रात आज भी नहीं भूले लोकतंत्र सेनानी
बलरामपुर, जून 26 -- बलरामपुर, संवाददाता। आपातकाल के जख्म आज भी ताजा हैं। लोकतंत्र की रक्षा के लिए दमन सहा। लोकतंत्र सेनानी दिवस पर वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों ने उस दौर की पीड़ा व संघर्ष को याद किया। लोकतंत्र सेनानियों का कहना है कि 25 जून 1975 की रात भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे काली रातों में से एक थी, जब तत्कालीन केंद्र सरकार ने देश में आपातकाल लागू कर नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित कर दिया था। लोकतंत्र सेनानियों ने बताया कि उस समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगा दिया गया था, प्रेस पर सेंसरशिप लागू कर दी गई थी और सरकार के विरोध को अपराध मान लिया गया था। हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा लोकतंत्र समर्थकों को बिना मुकदमे के जेलों में बंद क...
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