नई दिल्ली, फरवरी 11 -- नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जोर देकर कहा है कि आपराधिक न्याय प्रक्रिया अपने आप में सजा नहीं बन सकता। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने देशभर के अदालतों को आगाह किया कि यदि पहली नजर में कोई मामला नहीं बनता हो तो मुकदमा चलाने की इजाजत नहीं दे। जस्टिस संजय करोल और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले से जुड़े व्हिसलब्लोअर डॉ. आनंद राय के खिलाफ अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) एक्ट के तहत मुकदमा चलाने के लिए तय किए गए आरोपों को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की है। पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि 'मामले में मुकदमा चलाने के लिए आरोप तय करने से पहले जजों को तथ्यों की बारीकी और गंभीरता से जांच करनी चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि जजों को तथ्यों और बिना कानूनी आधार के मुकदमा चलाने की अ...