आपदा, बगावत और 1 लाख करोड़ का कर्ज: क्या 2027 की 'अग्निपरीक्षा' पास कर पाएंगे CM सुक्खू?
शिमला, अगस्त 24 -- हिमाचल प्रदेश की राजनीति में हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन का पुराना रिवाज रहा है। 1990 के बाद से न तो भारतीय जनता पार्टी और न ही कांग्रेस इस पहाड़ी सूबे में लगातार दूसरी बार सरकार बना पाई है। लेकिन 2027 का आगामी विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के लिए सिर्फ रिवाज बदलने की जंग नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी 'अग्निपरीक्षा' है। जमीन से उठकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे सुखविंदर सिंह सुक्खू के सामने इस वक्त चुनौतियों का एक ऐसा पहाड़ खड़ा है, जिसने उनकी हर चाल को बेहद नाजुक बना दिया है।आपदा की मार ने राज्य को दी 10000 करोड़ की चोट सुक्खू सरकार का कार्यकाल शुरुआत से ही संकटों से घिरा रहा। पद संभालने के महज छह महीने के भीतर हिमाचल ने इतिहास की सबसे भीषण मानसून आपदा झेली, जिसमें राज्य को 10,...
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