नई दिल्ली, नवम्बर 18 -- एक बार देवता, असुर और मनुष्य- तीनों एक साथ प्रजापति की सेवा में उपस्थित हुए। उन्होंने प्रजापति को प्रणाम करके नम्रतापूर्वक उनसे कहा, 'प्रजापते, हम आपसे विद्या पढ़ने के लिए आए हैं। कृपया हमें विद्यादान देकर कृतार्थ कीजिए।' विद्या के प्रति तीनों की आस्था देखकर प्रजापति प्रसन्न हो गए। वे उन्हें अपने पास रखकर विद्या पढ़ाने लगे। जब तीनों का अध्ययन-काल समाप्त हो गया, तो देवता ने प्रजापति से निवेदन किया, 'प्रजापते, मेरा अध्ययन-काल समाप्त हो चुका है। अब आप मुझे उपदेश देने की कृपा कीजिए।'तब प्रजापति ने उत्तर में कहा, 'ठीक है, तो सुनो मेरा उपदेश- 'द'।' प्रजापति ने उपदेश के रूप में 'द' के अतिरिक्त और कुछ नहीं कहा। वह देवता मन-ही-मन 'द' के अर्थ पर विचार करने लगा। प्रजापति ने देवता की ओर देखते हुए प्रश्न किया, 'क्या तुमने मेरे ...
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